हुसैन की टिप्पणी उस घटना के बाद आई है जब बीसीसीआई ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान का इंडियन प्रीमियर लीग फ्रेंचाइजी के साथ करार खत्म कर दिया. इस फैसले के बाद बांग्लादेश ने भारत में वर्ल्ड कप मैच खेलने से इनकार कर दिया, जिससे टीम को टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा. मामला तब और बढ़ गया जब पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अपने ग्रुप स्टेज मैच का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया, जिससे टूर्नामेंट की अनिश्चितता और बढ़ गई, जबकि इसकी शुरुआत में सिर्फ एक हफ्ता बचा था.
अगर भारत ऐसा करता तो क्या होता?
आईसीसी की नीति पर सवाल उठाते हुए हुसैन ने पूछा कि अगर भारत ने सुरक्षा या सरकारी प्रतिबंधों के चलते किसी देश में वर्ल्ड कप खेलने से इनकार किया होता, तो क्या आईसीसी इतनी सख्ती दिखाती? हुसैन ने सवाल किया, “अगर भारत, टूर्नामेंट से एक महीने पहले कहता कि ‘हमारी सरकार हमें किसी देश में वर्ल्ड कप खेलने की इजाजत नहीं देती’, तो क्या आईसीसी इतनी सख्त होती और कहती, ‘आपको नियम पता हैं, दुर्भाग्य है, हम आपको बाहर कर रहे हैं?”
उन्होंने कहा. “हर पक्ष सिर्फ एक चीज मांगता है. समानता. बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत को एक जैसा ट्रीटमेंट मिलना चाहिए. हां, भारत के फैंस कह सकते हैं, ‘रोते रहो, हमारे पास पैसा है!’ लेकिन ताकत के साथ जिम्मेदारी भी आती है. बार-बार बांग्लादेश या पाकिस्तान को बाहर करना उनके क्रिकेट को कमजोर करता है. इसी वजह से भारत-पाकिस्तान या भारत-बांग्लादेश के बड़े मैच अब एकतरफा हो गए हैं,”
टॉपिक खत्म करने से पहले हुसैन ने कहा कि उन्हें यह अच्छा लगा कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों के लिए आवाज उठाई. “मुझे सच में अच्छा लगा कि बांग्लादेश अपने फैसले पर कायम रहा, अपने खिलाड़ियों के लिए खड़ा हुआ. मुझे यह भी अच्छा लगा कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश का साथ दिया. किसी न किसी को तो कहना चाहिए, अब बहुत हो गया, राजनीति छोड़ो और क्रिकेट खेलो,”
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