भारतीय बोर्ड की तरफ से इस पूरे मामले पर धैर्य बेहद सीमित है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों ने फोर्स मेज्योर के दावे को कमजोर और चयनात्मक करार दिया है. एक बीसीसीआई अधिकारी ने कहा, “जिस दिन पाकिस्तान सरकार ने टी20 वर्ल्ड कप मैच के बहिष्कार का पोस्ट डाला, उसी दिन अगर पाकिस्तान को अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ खेलने में कोई दिक्कत नहीं थी, तो यह दलील स्वीकार नहीं की जा सकती. पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी समस्या है निरंतरता की कमी. अगर वाकई सरकारी निर्देशों के चलते खेलना असंभव है, तो फिर केवल एक ही मैच का बहिष्कार क्यों? पूरी टूर्नामेंट से हट क्यों नहीं जाते? कोलंबो जाने का फैसला ही क्यों किया गया?
क्या चाल चलने वाला है पाकिस्तान
सरल शब्दों में, पाकिस्तान का तर्क यह होगा कि यह बहिष्कार उनका खुद का फैसला नहीं था. पीसीबी के अधिकारी आईसीसी को यह बताने की तैयारी में हैं कि वे सरकार के निर्देशों के तहत काम कर रहे थे और यह स्थिति उनके “नियंत्रण से बाहर” थी. इसके सबूत के तौर पर वे 1 फरवरी को पाकिस्तान सरकार द्वारा किए गए उस सोशल मीडिया पोस्ट को संलग्न करना चाहते हैं, जिसमें सार्वजनिक रूप से यह कहा गया था कि टीम भारत के खिलाफ मैदान पर नहीं उतरेगी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पाकिस्तान के पास बचा आखिरी विकल्प हो सकता है. स्थिति से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से कहा गया, “यह उनका अंतिम सहारा है, क्योंकि भारत के खिलाफ मैच न खेलने का उनके पास कोई और कारण नहीं है. खासकर तब, जब यह मुकाबला श्रीलंका में खेला जाना है एक न्यूट्रल वेन्यू, जहां पाकिस्तान अपने बाकी सभी मैच खेलने पर सहमत है ऐसे में मैच छोड़ने के लिए न तो कोई क्रिकेटिंग कारण है, न लॉजिस्टिक और न ही सुरक्षा से जुड़ा.
क्या है क्या है ‘फोर्स मेज्योर क्लॉज’?
‘फोर्स मेज्योर क्लॉज’ एक फ्रांसीसी वाक्यांश है, जिसका अर्थ है असाधारण घटना. यह कानूनी अनुबंधों में एक प्रावधान (clause) है जो किसी पक्ष को अप्रत्याशित, नियंत्रण से बाहर की घटनाओं (जैसे युद्ध, दंगे, प्राकृतिक आपदा, या महामारी) के कारण संविदात्मक दायित्वों (contractual obligations) को पूरा करने से असमर्थ होने पर कानूनी रूप से राहत देता है. इसी का सहारा लेकर आईसीसी पीसीबी को कोर्ट में घसीटने का मन बना रहा है,
बॉयकाट का इतिहास भी पाकिस्तान के खिलाफ
पिछले वर्ल्ड कप्स में भी टीमों ने कभी-कभार मुकाबलों का बहिष्कार किया है, लेकिन तब सुरक्षा खतरे या ठोस कारण मौजूद थे. 2003 में इंग्लैंड ने धमकियों के कारण जिम्बाब्वे जाने से इनकार किया था, जबकि ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने गृहयुद्ध के दौरान श्रीलंका का दौरा नहीं किया था लेकिन पाकिस्तान के पास इस तरह का कोई बहाना नहीं है यही वजह है कि आईसीसी उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है ऐसा कुछ, जो पहले कभी नहीं हुआ. यदि भारत-पाकिस्तान मैच नहीं होता है, तो आईसीसी को लगभग 2230 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
इसके अलावा, राजनीति और क्रिकेट के बीच की दूरी का दावा भी कमजोर नजर आता है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पीसीबी के पैट्रन-इन-चीफ हैं, जबकि बोर्ड के चेयरमैन वर्तमान में एक केंद्रीय मंत्री हैं. ऐसे में राज्य और क्रिकेट बोर्ड के बीच दूरी होने का तर्क आईसीसी को शायद ही संतुष्ट कर पाए.
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