Difference between DLS and VJD Method: क्रिकेट मैच में बारिश या खराब रोशनी के कारण होने वाली बाधाओं से निपटने के लिए डकवर्थ-लुईस और वीजेडी मेथड दो प्रमुख फॉर्मूले इस्तेमाल किएए जाते हैं. जहां डीएलएस नियम इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल द्वारा वैश्विक स्तर पर मान्य है और ‘ओवर व विकेट’ पर आधारित है, वहीं वीजेडी मैथड को भारतीय इंजीनियर वी. जयदेवन ने तैयार किया है. ये नियम मुख्य रूप से तभी लागू किए जाते हैं जब सीमित ओवरों के मैच में खेल बाधित हो और दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम के लिए नया लक्ष्य निर्धारित करना अनिवार्य हो जाए. इस लेख में विस्तार से समझें इन दोनों नियमों की बारीकियां और इनके लागू होने की शर्तें.
डीएलएस(DLS) की गणना एक सॉफ्टवेयर के जरिए की जाती है जो यह देखता है कि बल्लेबाजी करने वाली टीम के पास कितने विकेट और कितने ओवर बचे हैं. यदि बारिश के कारण ओवर कम होते हैं, तो यह रिसोर्स के प्रतिशत के आधार पर लक्ष्य को घटाता या बढ़ाता है. उदाहरण के लिए, यदि पहली पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम ने 50 ओवर में 300 रन बनाए और बारिश के कारण दूसरी पारी को 20 ओवर का कर दिया गया, तो डीएलएस तय करेगा कि 20 ओवर में कितने रनों का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण होगा.

डकवर्थ लुईस नियम और वीजेडी में क्या अंतर है.
भारत में तैयार किया गया वीजेडी मैथड
वीजेडी (VJD) मैथड को केरल के इंजीनियर वी. जयदेवन ने तैयार किया था. जयदेवन का तर्क था कि डकवर्थ-लुईस नियम भारतीय उपमहाद्वीप की परिस्थितियों और मैच की लय को पूरी तरह नहीं समझता. वीजेडी मैथड मैच को विभिन्न चरणों में बांटता है. जैसे कि शुरुआती 10 ओवर, बीच के ओवर और अंतिम स्लॉग ओवर्स. यह नियम इस बात पर ध्यान देता है कि एक टीम मैच के अलग-अलग समय पर किस औसत से रन बनाती है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि वीजेडी मैथड ज्यादा ‘न्यूट्रल’ है क्योंकि यह मैच की गति को बेहतर तरीके से ट्रैक करता है. भारत के घरेलू टूर्नामेंट्स, जैसे कि विजय हजारे ट्रॉफी में लंबे समय से इसी नियम का पालन किया जाता रहा है. हाल में विजय हजारे ट्रॉफी में भी दो क्वार्टर फाइनल मुकाबलों का रिजल्ट वीजेडी मैथड से निकाला गया.
वीजेडी को आईसीसी खारिज कर चुका है
वीजेडी पद्धति का इस्तेमाल पहले इंडियन क्रिकेट लीग में किया जाता था.तमिलनाडु प्रीमियर लीग में आज भी इसी तकनीक से रन चेज काउंट किया जाता है। आईपीएल के चौथे और पांचवें सीजन में इसके इस्तेमाल पर बातचीत भी हुई थी. जयदेवन ने नौ साल पहले आईसीसी के सामने अपने वीजेडी मैथड का प्रस्ताव रखा था. तब आईसीसी ने यह कहकर इस प्रणाली को खारिज कर दिया था कि डकवर्थ लुईस मैथड में कोई खामी नहीं है. यह फैसला एक कमेटी ने सर्वसम्मति से लिया था. साथ ही कमेटी को ये भी भरोसा था कि वीजेडी पद्धति से शायद ही डकवर्थ लुईस सिस्टम में कोई सुधार किया जा सके. तब जयदेवन ने इसका विरोध किया था कि उनकी निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई.
वीजेडी पिछले खेलों के आंकड़े लेता है
वीजेडी मैथड का सबसे बड़ा लाफ यह है कि यह पिछले खेलों के आंकड़े लेता है और टीम के हाल के फॉर्म को को ध्यान में नहीं रखता है कि उसने कैसी परफॉर्मेंस की है.इस मैथड में पारी को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है. शुरुआती ओवर्स- जिसमें फिल्ड रिस्ट्रिक्शन के चलते तेजी से रन बनते हैं. बीच के ओवरों में रनरेट धीमा होता है और अंतिम ओवरों में फिर बढ़ जाता है. इस नियम की वजह से भी और व्यव्हारिक हो जाता है क्योंकि पूरे मैच के दौरान खिलाड़ी एक तरह से खेल ही नहीं सकता.

दोनों मैथड में टारगेट ऐसे होता है अलग अलग
अगर पहली टीम का स्कोर 150 है तो डीएलएस नियम के तहत विपक्षी टीम को 93 रन का लक्ष्य मिलेगा वहीं वीजेडी नियम के मुताबिक यह टारगेट 91 का हो जाएगा. इसी तरह पहली टीम अगर 200 का स्कोर करती है तो डीएलएस के तहत चेज करने वाली टीम को 124 का टारगेट मिलेगा जबकि वीजेडी के तहत यह टारगेट 118 रन का हो जाएगा.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें
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