कामरान अकमल ने कहा कि हम छोटी टीमों के साथ खेलकर खुश होते रहते हैं, उन्होंने साथी पूर्व क्रिकेटरों से पूछा कि क्या आपको लगता है कि पाकिस्तान दुनिया की टॉप 5 टीमों के साथ मैच खेलने के काबिल है. कामरान अकमल ने ओ कहा कि मुझे तो लगता है कि अगर भारत की सी टीम भी हमारे खिलाफ खेले तब भी हमें बुरी तरह हरा दे. प्रजेंट में तो मुझे देखकर नहीं लगता कि हमारी टीम में इतनी एबिलिटी है कि हम टॉप टीम बन सकें.
पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने कहा कि टीम में कोई मैनेजमेंट ही नहीं है, आप किसी भी प्लेयर को किसी भी नंबर पर खिला दे रहे हैं. फिर पहले क्यों ऐसा था, कि जो जिसका नंबर है उसी पर खेलता था और अच्छा परफॉर्म नहीं करता था तो बाहर जाता था. अब आप ओपनिंग करने वाले खिलाड़ी को अच्छा न खेलने पर 4 नंबर कर देते हैं.
बाबर की बात करें तो उनके पास बेस्ट चांस था, वो मैच को लंबा खींच सकते थे. मगर आपको लगा कि वो पूरे बैट से खेल रहे हैं, इसीलिए फिर खुद आउट होकर जा रहे हैं. इनमें जीतने का इंटेंट ही नहीं दिख रहा. अब मैं शादाब की बात करूं, नवाज की बात करूं. ये छोटी टीमों के खिलाप 15 बॉल में 30 रन बना लेते हैं, मजबूत टीम के खिलाफ क्यों नहीं.
उन्होंने कहा कि इस सिचुएशन में जो हमारे ‘ब्रैडमैन’ बनते हैं, वो किस बात के ब्रैडमैन हैं? क्या सिर्फ सोशल मीडिया के प्लेयर बन गए हैं? क्या उन्हें शर्म नहीं आती कि जब भी बड़ा मैच होता है, आप वापस चले जाते हैं? कभी तो जिताओ! रन सबसे ज्यादा बाबर आजम के हैं, पर क्या फायदा भाई उन रनों का? कितने मैच जिताए हैं, उन्होंने अब तक.
जब आप प्रेशर झेल नहीं सकते तो दूसरी टीम को पहले खेलने के लिए क्यों बुला लिया, मैं किस पर बात करूं, मैं फरहान पर बात करूं, साइम पर बात करूं, जिसे सिर्फ बॉलिंग करने के लिए रखा गया है. बाबर पर बात करूं, किस पर बात करूं. पिछले पांच इनिंग्समें ही देख लें तो बाबर का भारत के खिलाफ एवरेज 8 का है. दरअसल ये माइंडसेट का प्रॉब्ल्म है.
यह फेलियर हमारे सिस्टम का है, छोटी टीमों के सामने परफॉर्म करने के लिए हमारा माइंडसेट क्या था. देखिए एक ओवर शादाब से, फहीम से एक भी ओवर नहीं कराया. शाहीन से दो ओवर करवाए. 18 ओवर हमारे स्पिनर ने किए. जो आपका मैन वेपन हैं, उसको आप बाद में ला रहे हैं, ये कहां का क्रिकेट है. ऐसा लग रहा है कि इन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेटर खेली ही नहीं, जितने भी मैनेजमेंट के लोग हैं इन्हें देखना चाहिए, ये किसी की सुनते नहीं हैं. इनका बस एक टारगेट है कि अपनी रैंक से नीचे वाली टीम के साथ खेलो और खुश रहो.
नजीब उल हसनैन, पूर्व क्रिकेटर
उन्होंने कहा कि इस सिचुएशन में जो हमारे ‘ब्रैडमैन’ बनते हैं, वो किस बात के ब्रैडमैन हैं? क्या सिर्फ सोशल मीडिया के प्लेयर बन गए हैं? क्या उन्हें शर्म नहीं आती कि जब भी बड़ा मैच होता है, आप वापस चले जाते हैं? कभी तो जिताओ! रन सबसे ज्यादा बाबर आजम के हैं, पर क्या फायदा भाई उन रनों का? कितने मैच जिताए हैं, उन्होंने अब तक.
जब आप प्रेशर झेल नहीं सकते तो दूसरी टीम को पहले खेलने के लिए क्यों बुला लिया, मैं किस पर बात करूं, मैं फरहान पर बात करूं, साइम पर बात करूं, जिसे सिर्फ बॉलिंग करने के लिए रखा गया है. बाबर पर बात करूं, किस पर बात करूं. पिछले पांच इनिंग्समें ही देख लें तो बाबर का भारत के खिलाफ एवरेज 8 का है. दरअसल ये माइंडसेट का प्रॉब्ल्म है.
यह फेलियर हमारे सिस्टम का है, छोटी टीमों के सामने परफॉर्म करने के लिए हमारा माइंडसेट क्या था. देखिए एक ओवर शादाब से, फहीम से एक भी ओवर नहीं कराया. शाहीन से दो ओवर करवाए. 18 ओवर हमारे स्पिनर ने किए. जो आपका मैन वेपन हैं, उसको आप बाद में ला रहे हैं, ये कहां का क्रिकेट है. ऐसा लग रहा है कि इन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेटर खेली ही नहीं, जितने भी मैनेजमेंट के लोग हैं इन्हें देखना चाहिए, ये किसी की सुनते नहीं हैं. इनका बस एक टारगेट है कि अपनी रैंक से नीचे वाली टीम के साथ खेलो और खुश रहो.
नजीब उल हसनैन, पूर्व क्रिकेटर
पूर्व क्रिकेटर शोएब मलिक ने कहा कि मुझे याद है कि 2007 और उसके काफी बाद तक जब जिम्बाबे और बांग्लादेश जैसी टीमें आती थीं, तो हमारे पुराने खिलाड़ियों को आराम दिया जाता था. नए खिलाड़ियों को मौका दिया जाता था, ताकि वे ग्रूम हो सकें. उन प्लेयर्स को तैयार किया जाता था. मगर आज ऐसा बिल्कुल नहीं होता. आज तो जब इंग्लैंग या ऑस्ट्रेलिया की टीमें पाकिस्तान आती हैं तो वे नए खिलाड़ियों को भेजती हैं, जिन्हें डेब्यू करना होता है. यानी हमें वे सीरियसली ही नहीं लेते. बी और सी टीम आती हैं तो हम बराबरी पर बने रहते हैं.
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