जूही ने मात्र चार साल में कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर अलग पहचान बनाई है. जूही के पिता मंटू प्रजापति पेशे से मजदूर हैं और जयपुर में रहकर मजदूरी करते हैं. उन्होंने बताया कि बेटी दिन में स्कूल जाती है और शाम को खेलों की प्रैक्टिस करती है.
जूही के पिता मंटू प्रजापति ने बताया कि जूही इस समय राजस्थान के जयपुर में रहकर पढ़ाई कर रही है. पढ़ाई के साथ-साथ वह कराटे, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है. उन्होंने बताया कि ब्लैक बेल्ट का यह सम्मान साईगोकाई कराटे डो एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सिहान तरुण चक्रवर्ती और राहा मेमोरियल कराटे एकेडमी के कोच सेंसई द्वारा दिया गया है. मंटू ने बताया कि जूही की मेहनत, अनुशासन और नियमित अभ्यास का ही परिणाम है कि इतनी कम उम्र में उसने यह बड़ी सफलता हासिल की है.
अब तक छह बार रह चुकी है राष्ट्रीय चैंपियन
मंटू प्रजापति ने बताया कि जूही अब तक छह बार राष्ट्रीय चैंपियन, दो बार इंडिया ओपन इंटरनेशनल चैंपियन और आठ बार राज्य स्तरीय चैंपियन रह चुकी है. अपने छोटे से खेल करियर में जूही ने अब तक 72 पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें 50 स्वर्ण पदक शामिल हैं. यह आंकड़ा किसी भी अनुभवी खिलाड़ी के लिए गर्व का विषय हो सकता है, लेकिन जूही ने यह सब महज चार वर्षों में कर दिखाया है.
पिता जयपुर में करते हैं मजदूरी
जूही के पिता मंटू प्रजापति पेशे से मजदूर हैं और जयपुर में रहकर मजदूरी करते हैं. उन्होंने बताया कि बेटी दिन में स्कूल जाती है और शाम को खेलों की प्रैक्टिस करती है. सीमित संसाधनों के बावजूद वे अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. उनका कहना है कि जूही का लक्ष्य आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर भारत के लिए मेडल जीतना है. जूही की इस सफलता से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे जमुई जिले में खुशी और गर्व का माहौल है.
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