manpreet singh out of squad: मनप्रीत सिंह को हॉकी कैंप के 33 खिलाड़ियों में जगह नहीं मिली. आधिकारिक तौर पर उन्हें विश्राम दिया गया है. हॉकी सर्किल में पिछले कुछ महीनों से यह बात चल रही है कि उन्हें हटा दिया जाएगा, क्योंकि वो सबसे ज्यादा मैच खेलने के रिकॉर्ड से सिर्फ एक मैच पीछे हैं. 412 मैच का रिकॉर्ड दिलीप टिर्की के नाम है, जो हॉकी इंडिया के अध्यक्ष हैं.
411 मैच खेलने वाले मनप्रीत सिंह को भारतीय टीम से किया गया बाहर, वजह हैरान करने वाली
मनप्रीत सिंह इस समय 412 मैचों के राष्ट्रीय रिकॉर्ड से सिर्फ एक मैच दूर हैं यह रिकॉर्ड आज भी दिलीप टिर्की के नाम दर्ज है, जो संयोग से मौजूदा वक्त में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष भी हैं. यहीं से कहानी खेल के मैदान से निकलकर कॉरिडोर ऑफ पावर में दाखिल हो जाती है. क्या यह महज़ इत्तेफाक है कि रिकॉर्ड टूटने से ठीक पहले खिलाड़ी को ‘आराम’ दे दिया गया, क्या प्रदर्शन, अनुभव और फिटनेस से ज़्यादा अहम अब रिकॉर्ड बुक की हिफ़ाज़त हो गई है?और सबसे बड़ा सवाल क्या भारतीय हॉकी में इतिहास बचाने के लिए वर्तमान को बेंच पर बैठाया जा सकता है?जब चयन फैसलों पर जवाबों से ज़्यादा सवाल हों, और चुप्पी स्पष्टीकरण से ज़्यादा तेज़ सुनाई दे तो समझ लीजिए मामला सिर्फ टीम चयन का नहीं, नीयत और नीति का है.
रिकॉर्ड बचाने के लिए रास्ता रोका गया
मनप्रीत सिंह को हॉकी कैंप के 33 खिलाड़ियों में जगह नहीं मिली. आधिकारिक तौर पर उन्हें विश्राम दिया गया है. हॉकी सर्किल में पिछले कुछ महीनों से यह बात चल रही है कि उन्हें हटा दिया जाएगा, क्योंकि वो सबसे ज्यादा मैच खेलने के रिकॉर्ड से सिर्फ एक मैच पीछे हैं. 412 मैच का रिकॉर्ड दिलीप टिर्की के नाम है, जो हॉकी इंडिया के अध्यक्ष हैं. सवाल यही है कि क्या सिर्फ ज्यादा मैच खेलने का रिकॉर्ड न टूटे, इसलिए किसी को बाहर किया जा सकता है? वैसे इस बात को लेकर कोई प्रमाण नहीं हा कि अपना रिकॉर्ड न टूटे, इसलिए दिलीप टिर्की मनप्रीत को बाहर करवा सकते हैं. और अगर दिलीप टिर्की ऐसा चाहें भी, तो हॉकी इंडिया में उनके ‘दोस्तों’ की भारी तादाद उन्हें ऐसा करने देगी? ‘फेडरेशन वाले दोस्तों से पीड़ित’ दिलीप की कहानियां तो बहुत लोग सुनते सुनाते रहते हैं. फिर आखिर ऐसा क्या हुआ, जो मनप्रीत कैंप का हिस्सा नहीं हैं.
कहानी कुछ और है तो सार्वजनिक करें
मनप्रीत के साथ कुछ और खिलाड़ी भी नहीं हैं, जिनमें गोलकीपर कृषन पाठक शामिल हैं. हालांकि चर्चा उन पर बिल्कुल नहीं हो रही है. अगर विश्राम दिया गया है, तो कोई बात नहीं. यह आम बात है. लेकिन अगर मैदान के बाहर की या अनुशासन से जुड़ी घटना पर बाहर किया गया है, तो 412 मैचों के रिकॉर्ड की जगह उन घटनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए और पता करना चाहिए कि वो कितनी गंभीर हैं. मनप्रीत वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी हैं. उनकी टीम इंडिया को बहुत जरूरत है. लेकिन हर किसी को यह जानने का पूरा अधिकार है कि क्या वाकई मामला 412 मैच का है? या जैसा आधिकारिक तौर पर कहा गया, क्या वाकई मामला महज आराम का है? अगर ये दोनों कारण नहीं हैं, तो जिस वजह से हॉकी इंडिया की सेलेक्शन कमेटी ने उनको बाहर किया उसको सार्वजनिक करना चाहिए क्योंकि मामला काफी गंभीर है.
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