शुद्ध क्रिकेटिंग नजरिए से देखें तो शायद वे सही हों क्योंकि मैदान पर पाकिस्तान का भारत के खिलाफ कोई खास मौका नहीं बनता. दुबई में हुए राजनीतिक रूप से संवेदनशील एशिया कप के दौरान सूर्यकुमार यादव ने इस तथाकथित प्रतिद्वंद्विता पर तीखा तंज कसते हुए कहा था 8–0 को प्रतिद्वंद्विता नहीं कहते. लेकिन सच्चाई यह है कि भारत-पाकिस्तान का मुकाबला कभी भी सिर्फ क्रिकेट नहीं रहा. शुरुआत से ही यह टकराव राजनीति से संचालित रहा है. यही राजनीति पैसा खींचती है, तमाशे को जिंदा रखती है और पाकिस्तान ठीक इसी बात पर दांव लगा रहा है.
पाकिस्तान को होगा पश्चाताप
पाकिस्तान को अपनी टीम पर भरोसा नहीं है और उन्हें पता है कि मौजूदा टीम उस स्तर की नहीं है. इस फॉर्मेट में वे भारत के खिलाफ भारी अंडरडॉग होते और लगभग तय था कि हारते. इसलिए वे टीम पर नहीं, बल्कि इस मुकाबले की राजनीतिक प्रकृति पर खेल रहे हैं. टूर्नामेंट को ही बाधित करने की कोशिश में. दूसरा तर्क यह दिया जा रहा है कि इस फैसले से बीसीसीआई को आर्थिक नुकसान होगा. ऐसा सिर्फ वही लोग सोच सकते हैं जिन्हें क्रिकेट की अर्थव्यवस्था की कोई समझ नहीं है. दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई आईपीएल से इतनी कमाई करता है कि कोई भी आईसीसी वर्ल्ड कप उसके आसपास भी नहीं फटकता.
आईपीएल से होने वाली 6.2 अरब डॉलर की कमाई किसी एक भारत-पाकिस्तान मैच से कई गुना ज़्यादा है. बड़े परिप्रेक्ष्य में देखें तो ऐसी कमाई बीसीसीआई के लिए मायने ही नहीं रखती. लेकिन यही पैसा आईसीसी के सहयोग से चलने वाले एसोसिएट देशों के लिए जीवनरेखा है. बड़े मुकाबलों से मिलने वाली आय का इस्तेमाल इन देशों को चलाने और महिला क्रिकेट को फंड करने में होता है.
आईपीएल की कमाई वर्ल्ड कप से ज्यादा
असल में पाकिस्तान भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहा. बीसीसीआई के लिए यह फैसला लगभग अप्रासंगिक है. असली चोट छोटे क्रिकेटिंग देशों और खुद आईसीसी को लग रहा है जिसका पाकिस्तान भी सदस्य है यहीं पर पीसीबी के अलग-थलग पड़ने का खतरा है. यह भारत से लड़ाई नहीं है. भारत आगे बढ़ जाएगा आईपीएल का एक सीजन ही बीसीसीआई को आईसीसी के पूरे वर्ल्ड कप से कई गुना ज़्यादा कमा कर देता है लेकिन छोटे देशों के लिए पीसीबी का यह रुख एक विश्वासघात है यह वैश्विक क्रिकेट की आर्थिक सेहत को कमजोर करता है और अंततः आईसीसी को हस्तक्षेप के लिए मजबूर करेगा. आईसीसी तो अपने सदस्यों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था कर लेगा, लेकिन सवाल यह है पीसीबी अपने क्रिकेट और अपने वित्त की रक्षा कैसे करेगा.
क्यों खेल रहा है अंडर 19 वर्ल्ड कप मैच
जब द्विपक्षीय सीरीज पहले ही सूख चुकी हैं और पीएसएल में अंतरराष्ट्रीय सितारे लगातार कम होते जा रहे हैं, तब पाकिस्तान क्रिकेट आर्थिक रूप से कैसे टिकेगा. बीसीसीआई या आईसीसी को कथित नुकसान पर जश्न मनाने वाले सोशल-मीडिया क्रांतिकारियों को यह सोचना चाहिए कि पाकिस्तान क्रिकेट का भविष्य क्या है. क्या वह जिंदा भी रहेगा, या यह एक आत्मघाती फैसला साबित होगा. अंत में, पाकिस्तान की अंडर-19 टीम के बारे में भी सोचिए. अगर टी20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार किया जा रहा है, तो अंडर-19 वर्ल्ड कप का क्यों नहीं? आखिर वह भी तो वर्ल्ड कप ही है. कम से कम ऐसा करने से भारत के खिलाफ एक और हार की शर्मिंदगी से बचा जा सकता था.
लेकिन नहीं पाकिस्तान ने अंडर-19 टूर्नामेंट खेला और टी20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार किया. यह एक अजीब किस्म की असंगति है, जिसमें अपने ही खिलाड़ियों के लिए कोई संवेदना नहीं दिखती और आत्मघाती फैसलों को खुले दिल से अपनाया जाता है. हालांकि, जब से पाकिस्तान का रवैया विवेक या तर्क पर आधारित रहा है यह हमेशा राजनीति और तात्कालिक दिखावे का खेल रहा है और यह भोला-भाला छाती पीटना उसी सच्चाई को और उजागर करता है.
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