अहमदाबाद अब बीती बात है. परिणाम एक तथ्य है और चोट भी वास्तविक है. चाहे जितनी चर्चा हो या आलोचना, अतीत नहीं बदलेगा. सबक सीखिए, हाँ, पर ज़्यादा सोचने का वक्त नहीं है. वॉशिंगटन सुंदर को अक्षर पटेल से आगे खिलाना जरूरत से ज़्यादा सोचने का परिणाम था. खेल अपने तरीके से याद दिलाता है कि अंत में यह एक सरल खेल ही है.
पैटेर्न के बदलो प्लान
शीर्ष क्रम पर भारत के खिलाफ हर टीम ऑफ-स्पिन का दांव खेल रही है. पिछले तीन मैचों में यह रणनीति सफल रही. सलमान आगा ने पाकिस्तान के लिए, आर्यन दत्त ने नीदरलैंड्स के लिए और मार्क्रम ने दक्षिण अफ्रीका के लिए असर डाला. यह एक पैटर्न है. भारत को यह पैटर्न तोड़ना होगा. और यहीं आत्ममंथन अनिवार्य हो जाता है. अक्षर की जगह सुंदर को खिलाना गलत फैसला था. गलतियाँ होती हैं. यह भी एक थी. अब समय है इसे समझकर सुधारने का. कई नो-बॉल फेंककर आप विपक्ष को फ्री-हिट नहीं दे सकते. इसी से 14 अतिरिक्त रन बने और डेविड मिलर ने दो छक्के जड़ दिए. भारत को पेशेवर और समझदारी भरा क्रिकेट खेलना होगा.
गलती मानकर बनाए गेमप्लान
जैसे ही आप मान लेते हैं कि गलती हुई है, बदलाव की राह खुल जाती है. अगर दो बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ ऑफ-स्पिन समस्या बन रही है, तो Sanju Samson को पारी की शुरुआत करने भेजिए. शुरुआत में उन्हें स्ट्राइक दीजिए. इससे विपक्ष की योजना भी गड़बड़ा सकती है. दूसरा, वॉशिंगटन की जगह अक्षर को खिलाइए और गलती सुधारिए. अक्षर दबाव में हमेशा खरे उतरे हैं. जिम्बाब्वे और वेस्ट इंडीज के खिलाफ उनकी मौजूदगी अहम होगी.
एक्सट्रा बॉल से बचके
जब गलतियाँ पहचान लीं और स्वीकार कर लीं, तो समाधान लागू कीजिए. सतर्क रहिए और नो-बॉल से बचिए. जब नेट रन रेट को नुकसान पहुँचा हो, तब अतिरिक्त रन देना अपराध है. सिर्फ जीतना नहीं, बड़ी जीत दर्ज करनी है. हर बचाया गया रन मायने रखेगा.दूसरा, फील्डिंग में क्लिनिकल रहिए और हर रन बचाइए. कुछ चूकों ने भारत को नुकसान पहुँचाया है और अब समय है हर ढिलाई को खत्म करने का.अब से विश्व कप को नॉकआउट की तरह खेलिए. चार मैच बाकी हैं और खिताब जीतना है तो चारों जीतने होंगे. दूसरे नतीजों के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है. आपको सिर्फ अपने खेल पर ध्यान देना है और बाकी मैच मजबूती से जीतने हैं. मेरा अब भी मानना है कि इतना काफी होगा सेमीफाइनल के लिए.
अंत में, खिलाड़ी थोड़े अंधविश्वासी भी होते हैं. 2011 विश्व कप अभियान में, जिसका हिस्सा गौतम गंभीर थे, नागपुर में दक्षिण अफ्रीका से हार मिली थी. इसके बावजूद भारत ने कप जीता था. महिलाओं की टीम भी पूल चरण में दक्षिण अफ्रीका से हारी और बाद में फाइनल में उन्हें हराया. हर सकारात्मक संकेत को पकड़िए और आगे बढ़िए.
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