फगवाड़ा में जन्मे इटली के तेज गेंदबाज जसप्रीत सिंह भी उस देश में टॉप लेवल की क्रिकेट खेलने के लिए उत्साहित हैं, जिसे उन्होंने बचपन में छोड़ दिया था. नीदरलैंड के ऑफ स्पिनर आर्यन दत्त का जन्म भारत में नहीं हुआ, लेकिन वह भी अपने मूल देश में खेलने को लेकर खुश हैं. आईसीसी की इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाली 20 टीमों में कनाडा (11) की टीम में सबसे ज्यादा भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं. उसके बाद अमेरिका (09), ओमान (07) और यूएई (07) का नंबर आता है.
मेजबान भारत अपनी घरेलू धरती पर खिताब बचाने की कोशिश करेगा, लेकिन कई दूसरी टीमों में भी ‘भारतीय दबदबा’ दिखेगा. यहां हम कुछ भारतीय मूल के क्रिकेटरों के बारे में बता रहे हैं, जो टूर्नामेंट में असर डाल सकते हैं.
सौरभ नेत्रवलकर: भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेल चुके अमेरिका के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज नेत्रवलकर वर्ल्ड कप के पहले मैच में भारत का सामना करने के लिए मुंबई पहुंच चुके हैं. उन्होंने पिछले वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन किया था. सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले 34 साल के इस खिलाड़ी ने पिछली बार शानदार प्रदर्शन किया था, जिससे अमेरिका की टीम ने पाकिस्तान जैसी टीमों को हराकर सुपर-8 के लिए क्वालीफाई किया था. नेत्रवलकर भारत की मुश्किल पिचों पर खेलने के लिए बेताब हैं, लेकिन सात फरवरी को वानखेड़े में मुंबई टीम के अपने पुराने साथी सूर्यकुमार यादव के खिलाफ खेलते वक्त उन्हें अपनी भावनाओं पर काबू रखना होगा.
मोनांक पटेल: भारत के खिलाफ टूर्नामेंट के पहले मैच में अमेरिका की कप्तानी आनंद में जन्मे मोनांक पटेल करेंगे, जिन्होंने पिछले वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ मैच जिताऊ अर्धशतक लगाया था. 32 साल के इस ओपनर बल्लेबाज को गुजरात अंडर-19 टीम के अपने पुराने साथी जसप्रीत बुमराह का सामना करने का इंतजार है. वह मैदान के बाहर अपने बचपन के दिन याद कर रहे हैं. बुमराह अब दुनिया के सबसे अच्छे तेज गेंदबाजों में से एक हैं और मोनांक को बचपन में ही यह पता चल गया था.
मोनांक ने कहा, ‘हमने साथ में लाल और सफेद गेंद दोनों से क्रिकेट खेली है और वो वाकई बहुत खास पल थे. वो मेरे क्रिकेट करियर की शुरुआत थी और तब भी जसप्रीत जिस तरह खेल रहा था, हम जानते थे कि उसमें खास टैलेंट है और वह आगे जरूर बड़ा खिलाड़ी बनेगा.’
जसप्रीत सिंह: इटली के फगवाड़ा में जन्मे जसप्रीत सिंह पर भी सबकी नजरें रहेंगी. 32 साल के इस खिलाड़ी ने 2006 में अपने परिवार के साथ मिलान शिफ्ट किया था. उन्होंने इटली में टेप-बॉल क्रिकेट से शुरुआत की और 2016-17 में लाल गेंद की क्रिकेट में कदम रखा, फिर 2019 में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया. आईसीसी टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिलना उस तेज गेंदबाज के लिए सपने जैसा है, जो कुछ समय पहले तक उबर ड्राइवर के तौर पर काम करता था.
आर्यन दत्त: आर्यन दत्त को 2023 में वनडे वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय फैंस के सामने खेलने का अनुभव है. नीदरलैंड की टीम में भारतीय मूल के इकलौते क्रिकेटर 22 साल के आर्यन दत्त का लक्ष्य टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन कर टॉप टीमों को चौंकाना है. दत्त का परिवार 1980 के दशक में पंजाब से नीदरलैंड गया था. भारत में अब भी उनके परिवार के कुछ सदस्य रहते हैं.
दिलप्रीत बाजवा: गुरदासपुर में जन्मे बाजवा 2020 में कनाडा गए थे और छह साल बाद कनाडा की टीम के कप्तान बनकर भारत आए हैं. पंजाब में आयु वर्ग की क्रिकेट में बहुत रन बनाने के बावजूद बाजवा को वह मौके नहीं मिले, जिनकी उन्हें उम्मीद थी. उन्होंने निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया और कम प्रतिस्पर्धा वाले माहौल में अपनी क्रिकेट जारी रखी. कनाडा ग्लोबल टी20 लीग में मिली सफलता से उन्होंने कनाडा की टीम में जगह बनाई और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 23 साल के इस खिलाड़ी ने 2024 के टी20 वर्ल्ड कप में भी कनाडा की टीम का हिस्सा बने रहे.
जतिंदर सिंह: बाजवा की तरह लुधियाना में जन्मे जतिंदर भी अपने नए देश ओमान की टीम की कप्तानी करेंगे. 36 साल के इस खिलाड़ी ने एक दशक से ज्यादा क्रिकेट खेली है, लेकिन उन्हें भारत में खेलने का मौका कभी नहीं मिला. ओमान के सभी लीग मैच श्रीलंका में होने के कारण जतिंदर के लिए अपनी जन्मभूमि में खेलने का सपना पूरा करना मुश्किल लग रहा है.
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