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Apurva Kumari Cricketer: अपूर्वा कुमारी पूर्णिया की रहने वाली है और बिहार सीनियर महिला टीम में बतौर ऑलराउंडर अपूर्वा ने सीनियर महिला एकदिवसीय ट्रॉफी प्लेट ग्रुप शानदार प्रदर्शन कर न सिर्फ टीम को चैंपियन बनाया, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की प्लेयर ऑफ द सीरीज भी बनीं. लेकिन एक दिन दिन ऐसा आया जब करियर पूरी तरह से धड़ाम हो गया. आंखों के सामने की सब कुछ खत्म होता दिखा.
इस होनहार और वॉरियर खिलाड़ी का नाम है अपूर्वा कुमारी. पूर्णिया की रहने वाली है और बिहार सीनियर महिला टीम के लिए ओपनिंग के साथ ऑफ स्पिन भी डालती हैं. बतौर ऑलराउंडर अपूर्वा ने सीनियर महिला एकदिवसीय ट्रॉफी प्लेट ग्रुप शानदार प्रदर्शन कर न सिर्फ टीम को चैंपियन बनाया, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की प्लेयर ऑफ द सीरीज भी बनीं.
हर लिस्ट में नंबर 1
प्लेट ग्रुप के 6 मैचों में अपूर्वा ने 351 रन बनाए. इसमें 116 रन की सर्वश्रेष्ठ पारी, एक शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं. रन बनाने की लिस्ट में वह पूरे ग्रुप में सबसे आगे रहीं. गेंदबाजी में भी उन्होंने 13 विकेट लेकर अपना दबदबा दिखाया. 280 डॉट बॉल और 17 मेडेन ओवर के साथ उन्होंने इकोनॉमी रेट में भी टॉप किया. यानी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में वह सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी साबित हुईं.
भाइयों के साथ खेलते-खेलते बनी स्टार
अपूर्वा बताती हैं कि उन्होंने शुरुआत टेनिस और प्लास्टिक बॉल से अपने भाइयों के साथ खेलकर की थी. प्रोफेशनल क्रिकेट का कोई प्लान नहीं था, लेकिन 2017 में बिहार क्रिकेट को मान्यता मिलने के बाद जिला सचिव और कोच विजय भारती ने उनका टैलेंट पहचाना और ट्रायल देने को कहा. ट्रायल में चयन हुआ और तब से वह लगातार राज्य टीम का हिस्सा हैं. इतना ही नहीं, सात साल तक टीम की कप्तानी भी संभाल चुकी हैं.
धोनी से मिली प्रेरणा
अपूर्वा कहती हैं कि उन्होंने बल्ला उठाने की प्रेरणा भारतीय दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी को देखकर ली. उनका हेयर स्टाइल तक कॉपी किया. लोग उन्हें मजाक में “धोनी” कहकर चिढ़ाते थे, लेकिन वही मजाक उनके लिए मोटिवेशन बन गया. जब उन्होंने घरवालों को क्रिकेट के बारे में बताया तो पहले कोई तैयार नहीं हुआ. घरवालों ने कहा कि इसमें कोई करियर नहीं है. लेकिन, बड़ी बहन के समझाने के बाद खेलने की इजाज़त मिली.
कोविड के बाद गिरा करियर, मानसिक संघर्ष
2017 से 2019 तक उनका प्रदर्शन शानदार रहा. नॉर्थ ईस्ट में अपनी पहली सेंचुरी जड़ी तो इंटरव्यू लेने वालों की भीड़ घर तक पहुंचती थी. मम्मी समेत सभी लोग प्राउड फील करते थे. सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन पता नहीं अचानक क्या हुआ कोविड के बाद उनका फॉर्म गिर गया. सपोर्ट की कमी और लगातार खराब दौर ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया. एक समय लगा कि सब खत्म हो गया. परिवार के सहारे और खुद पर भरोसे ने उन्हें फिर खड़ा किया.
खुद पर भरोसा और मेहनत से कमबैक
अपूर्वा ने मानसिक ट्रॉमा से निकलने के बाद खुद पर कड़ी मेहनत की. रोज 8 घंटे से ज्यादा प्रैक्टिस, सुबह फिटनेस और देर रात तक नेट सेशन. यही रूटीन उनकी वापसी की वजह बना. उसी मेहनत का नतीजा है कि आज वह फिर से सुर्खियों में हैं और टीम को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं. मेहनत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वो और उनका जूनियर दोस्त अभिषेक बाबू सुबह से लेकर देर रात तक लगातार नेट पर पसीना बहाते रहते हैं.
अपूर्वा का सपना अब भारतीय महिला टीम में जगह
बनाना और विमेंस प्रीमियर लीग जैसे बड़े मंच पर खेलना है. उनका कहना है कि यह कमबैक उनके करियर की दूसरी शुरुआत है और वह इसे लंबा चलाना चाहती हैं.
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