आईसीसी के डिप्टी चेयरमैन और सिंगापुर के प्रतिनिधि इमरान ख्वाजा को बोर्ड ने इस विवादास्पद मुद्दे पर मध्यस्थ चुना था. वे आईसीसी में प्रभावशाली हस्ती माने जाते हैं और बोर्ड में एसोसिएट मेंबर डायरेक्टर के तौर पर वोटिंग राइट्स रखते हैं. पीसीबी की ओर से मोहसिन नकवी और बांग्लादेश की ओर से पूर्व खिलाड़ी अमीनुल इस्लाम ने बैठक में हिस्सा लिया. तीनों ने मिलकर इस गतिरोध का समाधान निकाला और हफ्तों से चली आ रही अनिश्चितता को खत्म किया.
1 फरवरी- पाकिस्तानी सरकार ने घोषणा की थी कि उनकी टीम टूर्नामेंट में खेलेगी, लेकिन भारत के खिलाफ नहीं. जब तक आईसीसी को पीसीबी से औपचारिक पुष्टि नहीं मिली, तब तक उसने चेतावनी दी थी कि अगर पाकिस्तान मुकाबले से हटता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. हालांकि, पाकिस्तान अपने फैसले पर अड़ा रहा.
बाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सार्वजनिक रूप से इस रुख को दोहराया, जिससे बहिष्कार की धमकी लगभग आधिकारिक हो गई. दस दिन से भी कम समय में पीसीबी का सख्त रुख नरम पड़ गया. सोमवार को अपने फैसले को पलटते हुए विश्व क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता को फिर से शुरू कर दिया.
3 फरवरी – आईसीसी और पीसीबी के बीच पर्दे के पीछे बातचीत हुई. आईसीसी ने ग्रुप ए के इस बड़े मुकाबले को कराने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी थीं. आईसीसी के डिप्टी चेयरमैन इमरान ख्वाजा और एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन मुबाशिर उस्मानी ने पीसीबी प्रमुख नकवी और पीएसएल प्रमुख व नकवी के वरिष्ठ सलाहकार सलमान नसीर के साथ कई बार कॉल और बैठकें कीं. ये प्रयास एक हफ्ते पहले ही शुरू हो गए थे. पाकिस्तानी सरकार के ट्वीट के बाद ये और तेज हो गए.
5 फरवरी – श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) के अध्यक्ष शम्मी सिल्वा ने नकवी को पत्र लिखकर भारत के खिलाफ मैच छोड़ने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया. चेतावनी दी कि इस फैसले से श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट आ सकता है, क्योंकि मुकाबले के लिए पहले से ही बड़े पैमाने पर तैयारियां हो चुकी हैं. पीसीबी को श्रीलंका के पिछले सहयोग की भी याद दिलाई गई, जिसमें संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण समय में पाकिस्तान का दौरा करना भी शामिल था.
6 फरवरी – खबरों के मुताबिक नकवी ने अपने श्रीलंकाई समकक्ष को आश्वासन दिया कि वह पाकिस्तान सरकार से सलाह-मशविरा कर जवाब देंगे.
7 फरवरी – पाकिस्तान की नीदरलैंड्स के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप ओपनर में नर्वस जीत के कुछ ही देर बाद, पीटीआई की एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ. पीसीबी ने औपचारिक रूप से आईसीसी को पत्र लिखकर ‘फोर्स मेज्योर’ क्लॉज लागू करने की मांग की है. ये कोशिश भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार को जायज ठहराने की थी. आईसीसी इससे संतुष्ट नहीं हुआ और उसने ठोस कारणों के साथ यह भी सबूत मांगा कि सभी संभावित समाधान आजमाए जा चुके हैं.
8 फरवरी – मध्यस्थ के रूप में नियुक्त ख्वाजा लाहौर पहुंचे और नकवी व बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष इस्लाम के साथ बैठक की. यह बैठक पांच घंटे से ज्यादा चली, जिसमें पाकिस्तान ने कई मांगें रखीं, हालांकि दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से नतीजे का खुलासा नहीं किया.
9 फरवरी (सुबह) – श्रीलंका के बाद एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड ने भी पीसीबी को पत्र लिखकर अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया. ईसीबी ने चेतावनी दी कि बहिष्कार “खेल को नुकसान पहुंचाएगा” और कई सदस्य देशों, खासकर एसोसिएट टीमों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
9 फरवरी (शाम) – नकवी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की और उन्हें लाहौर में हुई चर्चाओं और बीसीबी, एसएलसी और एमिरेट्स बोर्ड की अपीलों के बारे में जानकारी दी. शरीफ ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार डिसानायके से भी फोन पर बात की, जिन्होंने पाकिस्तान से मुकाबला खेलने का अनुरोध दोहराया. बाद में पाकिस्तानी सरकार ने स्पष्ट किया कि बहिष्कार का फैसला पलटने का मकसद “क्रिकेट की भावना की रक्षा करना और इस वैश्विक खेल की सभी भागीदार देशों में निरंतरता को समर्थन देना” है.
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