उसके बाद क्वार्टर फाइनल में वह भूटान से 5-9 से जीतीं. उसके बाद सेमी फाइनल मैच में वह सिंगापुर से 11-9 से जीतीं और फाइनल मैच में उन्हें 2 अंकों से संतोष करना पड़ा, जिसकी वजह से उन्हें जूनियर वर्ग अंडर- 42 किग्रा क्रयोगी स्पर्धा में रजत पदक मिला.
सिल्वर मेडल से करना पड़ा संतोष
कोच दिलीप कुमार गुप्ता ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि रिया वर्मा ने पहले 42 किग्रा भार वर्ग में स्टेट टूर्नामेंट खेला था, जो नोएडा में हुआ था. वहां पर वह स्वर्ण पदक प्राप्त की थीं, जिसके बाद उनका सेलेक्शन नेशनल के लिए हो गया, जो दिल्ली के कांत दर्शन पब्लिक स्कूल में हुआ था. वहां पर भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था.
इसके बाद उनका सेलेक्शन एशियन सिख गेम्स के लिए हो गया, जो दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में आयोजित हुआ था. वहां उन्होंने टोटल 5 देशों के साथ खेला था, जिसमें सभी मैच जीतते हुए उन्होंने फाइनल में प्रवेश किया था, लेकिन उसमें उन्हें हार मिली. इसकी वजह से उन्हें सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा.
स्टेट और नेशनल में जीता गोल्ड
वहीं, रिया वर्मा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वह चंदौली जिले के मुगलसराय की रहने वाली हैं और वह पिछले 5 सालों से ताइक्वांडो सीख रही हैं और खेल रही हैं. उन्होंने बताया कि वह अभी अक्टूबर महीने में ताइक्वान्डो का स्टेट चैंपियनशिप खेली थीं, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था. उसके बाद वह नेशनल के लिए सिलेक्ट हुईं, फिर वह नेशनल खेलने गईं, वहां भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीता.
उसके बाद उन्होंने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगता सिख गेम्स में प्रतिभाग किया, जहां उन्होंने सिल्वर मेडल जीता. उनकी फाइनल फाइट सिंगापुर से हुई थी, जहां उनका 9 और 11 का स्कोर रहा, जिसकी वजह से उन्होंने सिल्वर मेडल जीता.
परिवार वालों ने हमेशा दिया साथ
रिया ने बताया कि रिया के परिवारवालों ने उसका हमेशा साथ दिया है. पिछले 5 सालों से वो लोग उसका लगातार सपोर्ट कर रहे हैं और उसका साथ दे रहे हैं. उसके दिलीप सर ने भी उसका हमेशा साथ दिया है और उसे निरंतर प्रैक्टिस करवा रहे हैं, ताकि वह आगे भी देश के लिए खेले और देश का नाम रोशन करे.
रिया ने बताया कि वह खेलने के अलावा पढ़ाई करती हैं. वह बीसीए 2nd ईयर की स्टूडेंट हैं. आपको बता दें कि रिया अपनी उम्र की लड़कियों के लिए एक रोल मॉडल बन रही हैं, ताकि लड़कियां किसी भी गेम में भाग ले सकें. रिया आज चंदौली जैसे छोटे कस्बे से निकलकर दिल्ली जैसे जगह पर खेल रही हैं और सिल्वर मेडल ला रही हैं. यह सभी लड़कियों के लिए गर्व का पल है.
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