मन्हास ने एक इंटरव्यू में कहा जब मैंने प्रशासक का पद संभाला था, तब यह इतना आसान नहीं था. बीसीसीआई के तत्कालीन सचिव जय शाह ने मुझे पूरी छूट दी थी और कहा था कि जम्मू कश्मीर की क्रिकेट को पटरी पर लाने के लिए जो भी जरूरी हो, वह करो. जम्मू कश्मीर ने कल्याणी में खेले गए रणजी सेमीफाइनल में दो बार के पूर्व चैंपियन बंगाल पर छह विकेट से जीत हासिल की.
BCCI अध्यक्ष बोले दिल खुश हो गया
बोर्ड प्रेसीडेंट मन्हास ने कहा, ‘‘मैं टीवी पर मैच देख रहा था मोहम्मद शमी और आकाश दीप जैसे खिलाड़ियों वाली बंगाल की टीम को हराना बहुत बड़ी उपलब्धि है. मेरे अंदर का क्रिकेटर भावुक है क्योंकि मैंने अपना प्रथम श्रेणी का करियर वहीं समाप्त किया और राज्य इकाई के साथ भी काम किया. टीम के बारे में बात करते हुए मन्हास ने कहा कि वह जानते थे कि जम्मू कश्मीर में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन वहां एक उचित व्यवस्था की जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता को श्रेय देना चाहूंगा, जिन्होंने सराहनीय काम किया है. जब मैंने पद संभाला तो हमने प्रतिभा खोज प्रतियोगिता आयोजित की.
सबका साथ टीम का विकास
मन्हास ने बीसीसीआई की उस उप-समिति में अपने सहयोगी का जिक्र किया, जो तब जम्मू कश्मीर क्रिकेट प्रशासन को संभाल रही थी. उन्होंने कहा, बाएं हाथ का तेज गेंदबाज सुनील कुमार उसी प्रतिभा खोज का नतीजा है. दिल्ली में करीब दो दशक खेलने के बाद मुझे पता था कि इस स्तर पर सफल होने के लिए क्या जरूरी है हमारी क्रिकेट समिति ने ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ बहुत अच्छा काम किया. दिल्ली के दिग्गज खिलाड़ी मन्हास ने 157 प्रथम श्रेणी मैचों में 9714 रन बनाए हैं.
सही लोगों का मिला साथ
जेकेसीए में कुप्रबंधन के कारण जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के निर्देशों पर इस समिति का गठन किया गया था. मन्हास ने कहा कि उनका सबसे बड़ा योगदान शायद पारस डोगरा जैसे घरेलू दिग्गज को 41 साल की उम्र में राज्य के लिए पेशेवर खिलाड़ी के रूप में खेलने के लिए प्रेरित करना था. डोगरा वर्तमान में उस टीम की कप्तानी कर रहे हैं जिसमें मुख्य कोच पूर्व भारतीय खिलाड़ी अजय शर्मा हैं. मन्हास ने कहा, ‘‘मैंने पारस के साथ और उसके खिलाफ बहुत क्रिकेट खेली है. वह एक शानदार क्रिकेटर और पेशेवर खिलाड़ी है. पारस ने अपनी क्रिकेट हिमाचल प्रदेश में खेली है, जहां की परिस्थितियां जम्मू कश्मीर से काफी मिलती-जुलती हैं.
मुख्यमंत्री ने दिल खोलकर बधाई दी
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस केंद्र शासित प्रदेश की क्रिकेट टीम के पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचने को बड़ी उपलब्धि बताया और बुधवार को खिलाड़ियों को बधाई दी. जम्मू कश्मीर की टीम ने अपने पहले रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में बंगाल को छह विकेट से हराकर 67 साल में पहली बार इस घरेलू टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचकर इतिहास बना दिया. उमर ने जम्मू कश्मीर की जनता की तरफ से भी टीम को बधाई दी और भरोसा जताया कि इस क्षेत्र के क्रिकेटर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे. उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘मैं अपनी तरफ से और जम्मू कश्मीर के लोगों की तरफ से हमारी क्रिकेट टीम को हार्दिक बधाई देता हूं. मुझे उम्मीद है कि वह दिन दूर नहीं जब हम जम्मू कश्मीर के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में अहम भूमिका निभाते हुए देखेंगे.’ उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में टीम की प्रगति लगातार मेहनत, अनुशासन, कोचिंग और सहायक स्टाफ के मार्गदर्शन का नतीजा है.
उमर ने कहा, ‘हमारी टीम ने शानदार प्रगति की है. यह उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, कोच के मार्गदर्शन और सहायक स्टाफ के समर्पण का परिणाम है. रणजी ट्रॉफी में किसी एक व्यक्ति के सहारे जीत नहीं मिल सकती. यह हमारी पूरी टीम और सहयोगी स्टाफ की जीत है.’
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