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इंग्लैंड के खिलाफ बड़े मैच से एक दिन पहले आयोजित वैकल्पिक अभ्यास सत्र में वरुण चक्रवर्ती ने लगभग 37 मिनट तक लगातार गेंदबाजी की. इस दौरान टीम इंडिया के बॉलिंग कोच मॉर्नी मॉर्कल और सहायक कोच रयान टेन डोशेट उनके साथ थे. रुण ने पिच पर एक रुमाल रखकर गेंदबाजी की प्रैक्टिस की. यह ड्रिल ‘स्पॉट बॉलिंग’ के लिए मशहूर है.
वरुण चक्रवर्ती ने 37 मिनट की रुमल रखकर गेंदबाजी, मजबूत किया अपना चक्रव्यूह
वर्ल्ड कप के शुरु होने से पहले टीम मैनेजमेंट वरुण चक्रवर्ती और अभिषेक शर्मा को अपने ट्रंप कॉर्ड के तोर पर देख रहा था पर सेमीफाइनल तक आते आते दोनों पर से भरोसी सरकता हुआ नजर आया. इसीलिए वरुण के साथ खासतौर पर सेंटर विकेट के बगल में कुछ ऐसा माहौल तैयार किया गया जिससे वरुण मैच की तरह इस वर्चुवल सेशन में अपनी गेंदबाजी को वो धार दे सके जिसके लिए वो जाने जाते रहे है.
37 मिनट में रुमाल पर किया कमाल
इंग्लैंड के खिलाफ बड़े मैच से एक दिन पहले आयोजित वैकल्पिक अभ्यास सत्र में वरुण चक्रवर्ती ने लगभग 37 मिनट तक लगातार गेंदबाजी की. इस दौरान टीम इंडिया के बॉलिंग कोच मॉर्नी मॉर्कल और सहायक कोच रयान टेन डोशेट उनके साथ थे. रुण ने पिच पर एक रुमाल रखकर गेंदबाजी की प्रैक्टिस की. यह ड्रिल ‘स्पॉट बॉलिंग’ के लिए मशहूर है. इसमें गेंदबाज एक निश्चित बिंदु पर गेंद फेंकने का प्रयास करता है ताकि वह अपनी लाइन और लेंथ पर पूर्ण नियंत्रण पा सके.
ऑफ स्टंप और ‘विकेट टू विकेट’ पर फोकस
इस वर्ल्ड कप में वरुण चक्रवर्ती का प्रदर्शन अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, विशेष रूप से सुपर 8 चरण में उन्होंने 10.17 की इकॉनमी से रन लुटाए. अपनी इसी लय को वापस पाने के लिए उन्होंने खास रणनीतियों पर काम किया. वरुण ने लगातार ऑफ स्टंप के बाहर ‘गुड लेंथ’ एरिया को टारगेट किया,मॉर्कल की सलाह पर उन्होंने अपनी सीधी गेंदों को विकेटों के बीच रखने का अभ्यास किया ताकि बल्लेबाजों के लिए शॉट मारना मुश्किल हो. पूर्व दिग्गज स्पिनर कुंबले ने भी उन्हें सलाह दी है कि वह अपनी विविधता को सरल रखें और लय पर ध्यान दें.
क्यों अहम है रुमाल ड्रिल?
पुराने दौर में जब वीडियो विश्लेषण की सुविधा नहीं थी, तब दिग्गज गेंदबाज अपनी सटीक लेंथ मापने के लिए पिच पर सिक्का या रुमाल रखकर अभ्यास करते थे. यह तकनीक गेंदबाज की एकाग्रता बढ़ाती है. कोच मॉर्कल ने बताया कि यह वरुण का प्री-मैच रूटीन है, जो उन्हें मानसिक स्पष्टता और आत्मविश्वास देता है.
मॉर्कल के अनुसार, वरुण कभी-कभी खुद पर बहुत दबाव बना लेते हैं। इस तरह के सत्र उन्हें खेल के बेसिक्स से जोड़ते हैं. सेमीफाइनल जैसे बड़े मंच पर इंग्लैंड के ‘स्ट्रीट स्मार्ट’ बल्लेबाजों के सामने वरुण चक्रवर्ती का यह ‘बैक टू बेसिक्स’ अवतार भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
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