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zimbabwe big threat to india: टीम इंडिया के लिए 26 फरवरी का दिन बहुत चुनौतीपूर्ण होने वाला है. चेन्नई की पिच अपनी धीमी गति और टर्न के लिए जानी जाती है. ज़िम्बाब्वे के पास ऐसे स्पिनर्स हैं जो इन परिस्थितियों का बखूबी फायदा उठाना जानते हैं. भारतीय टीम अक्सर ‘अंडरडॉग’ टीमों के खिलाफ थोड़ा रिलैक्स हो जाती है, और ज़िम्बाब्वे इसी मौके की ताक में रहेगी.
पहले ऑस्ट्रेलिया फिर श्रीलंका को हराने वाली जिम्बाब्वे टीम भारत के हो सकती है खतरा
क्रिकेट की दुनिया में जब कोई छोटी टीम किसी दिग्गज को हराती है, तो उसे ‘उलटफेर’ कहा जाता है, लेकिन ज़िम्बाब्वे ने जो किया है उसे उलटफेर कहना इस टीम की काबिलियत की तौहीन होगी. ग्रुप मैच में ज़िम्बाब्वे ने मेजबान श्रीलंका की लंका ऐसी लगाई कि पूरी दुनिया देखती रह गई 6 विकेट से मिली यह जीत कोई तुक्का नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का नतीजा थी. इससे पहले उन्होंने पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया था. अब ज़िम्बाब्वे का अगला निशाना है टीम इंडिया! 26 फरवरी को चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में सुपर-8 का यह मुकाबला केवल एक मैच नहीं, बल्कि भारतीय टीम के लिए ‘अलार्म क्लॉक’ है.
ज़िम्बाब्वे की ताकत: आखिर कैसे बदला गेम?
ज़िम्बाब्वे की इस नई टीम में पुराने दौर वाली जिजीविषा और आधुनिक क्रिकेट की आक्रामकता का बेजोड़ संगम है। उनकी ताकत के तीन मुख्य स्तंभ हैं. ज़िम्बाब्वे के बल्लेबाज अब सिर्फ विकेट बचाने के लिए नहीं खेलते. श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने दिखाया कि वे स्पिन के खिलाफ कितने घातक हो सकते हैं. सिकंदर रज़ा का अनुभव और युवाओं की बेखौफ हिटिंग किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा सकती है.
अनुशासित गेंदबाजी और फील्डिंग: ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को कम स्कोर पर रोकना यह बताता है कि उनकी गेंदबाजी में धार है. उनके तेज गेंदबाज शुरुआती ओवरों में स्विंग का फायदा उठा रहे हैं, तो वहीं स्पिनर्स मिडिल ओवरों में बल्लेबाजों को बांध कर रख रहे हैं. उनकी फील्डिंग इस वक्त ‘बुलेट’ की रफ्तार जैसी है.
सावधान टीम इंडिया
कप्तान रज़ा इस टीम की आत्मा हैं और उनकी कप्तानी और ऑलराउंड प्रदर्शन ने टीम में वह विश्वास भर दिया है कि वे दुनिया की किसी भी टीम को धूल चटा सकते हैं. टीम इंडिया के लिए 26 फरवरी का दिन बहुत चुनौतीपूर्ण होने वाला है. चेन्नई की पिच अपनी धीमी गति और टर्न के लिए जानी जाती है. ज़िम्बाब्वे के पास ऐसे स्पिनर्स हैं जो इन परिस्थितियों का बखूबी फायदा उठाना जानते हैं. भारतीय टीम अक्सर ‘अंडरडॉग’ टीमों के खिलाफ थोड़ा रिलैक्स हो जाती है, और ज़िम्बाब्वे इसी मौके की ताक में रहेगी. याद रहे, जिस टीम ने ऑस्ट्रेलिया को बाहर किया हो और श्रीलंका को उनके घर जैसी पिचों पर पटखनी दी हो, उसे हल्के में लेना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा. चेन्नई में गर्मी और उमस के साथ-साथ ज़िम्बाब्वे का जोश टीम इंडिया के पसीने छुड़ा सकता है.
क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, और ज़िम्बाब्वे इस समय उस अनिश्चितता का सबसे बड़ा चेहरा है. भारत को अपनी पूरी स्ट्रेंथ और बेहतरीन प्लानिंग के साथ मैदान पर उतरना होगा अगर 26 फरवरी को चेपॉक में टीम इंडिया ने जरा भी ढिलाई बरती, तो ज़िम्बाब्वे इतिहास रचने से पीछे नहीं हटेगा.
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