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अभिषेक 30 गेंदों पर 55 रन बनाने के बाद जब पवेलिएन लौटे तो वो टीम को रॉकेट वाली शुरुआत दिला चुके थे. 13वें ओवर में जब मोपासा की गेंद पर आउट हुए तो स्कोरबोर्ड पर 150 लग चुका था. ये आंक़ड़े इस बात की तरफ इशारा कर रहे थे कि जब शर्मा जी चलते है तो फिर मैदान पर गेंदबाजों की बिल्कुल नहीं चलती.
फॉर्म में लौटे अभिषेक शर्मा, जिम्बाब्वे के खिलाफ 30 गेंदों पर बनाए 55 रन
अभिषेक 30 गेंदों पर 55 रन बनाने के बाद जब पवेलिएन लौटे तो वो टीम को रॉकेट वाली शुरुआत दिला चुके थे. 13वें ओवर में जब मोपासा की गेंद पर आउट हुए तो स्कोरबोर्ड पर 150 लग चुका था. ये आंक़ड़े इस बात की तरफ इशारा कर रहे थे कि जब शर्मा जी चलते है तो फिर मैदान पर गेंदबाजों की बिल्कुल नहीं चलती.
खराब दौर का अंत और धमाकेदार वापसी
अभिषेक शर्मा के लिए इस वर्ल्ड कप की शुरुआत किसी बुरे सपने जैसी रही थी. वह अपने पहले तीन मैचों (USA, पाकिस्तान और नीदरलैंड्स) में लगातार शून्य (डक) पर आउट हुए थे. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछले मैच में उन्होंने 15 रन बनाकर खाता तो खोला, लेकिन वह लय में नजर नहीं आ रहे थे. ज़िम्बाब्वे के खिलाफ इस मुकाबले से पहले उनके स्थान पर संजू सैमसन को खिलाने की चर्चाएं तेज थीं. हालांकि, कप्तान और कोच गौतम गंभीर ने उन पर भरोसा बनाए रखा और उन्हें सलामी बल्लेबाजी के लिए भेजा.
पावरप्ले में बरपाया कहर
पारी की शुरुआत से ही अभिषेक ने सकारात्मक रुख अपनाया और उन्होंने पावरप्ले के दौरान ही 3 गगनचुंबी छक्के जड़कर भारतीय स्कोर को 6 ओवरों में 80/1 तक पहुंचा दिया. यह इस वर्ल्ड कप में भारत की अब तक की सबसे बेहतरीन शुरुआत में से एक रही उन्होंने ज़िम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्रैड इवांस और रिचर्ड नगारवा को निशाना बनाते हुए मैदान के हर कोने में रन बटोरे.
टीम मैनेजमेंट का अटूट विश्वास
अभिषेक की इस पारी में टीम मैनेजमेंट की भूमिका काफी अहम रही लगातार चार मैचों में विफल रहने के बाद भी उन्हें अंतिम एकादश से बाहर नहीं किया गया पूर्व क्रिकेटरों का मानना था कि अभिषेक “ओवरथिंकिंग” का शिकार हो रहे हैं ऐसे में मैनेजमेंट ने उन्हें खुद को साबित करने का एक और मौका दिया. अभिषेक ने अपनी इस पारी में 192.31 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की, जो आधुनिक टी20 क्रिकेट की मांग है.
ज़िम्बाब्वे की कमजोरी का फायदा
चेन्नई की पिच, जो आमतौर पर स्पिनरों की मददगार मानी जाती है, इस बार बल्लेबाजों के लिए अनुकूल रही. अभिषेक ने ज़िम्बाब्वे की अनुभवहीन गेंदबाजी और खराब फील्डिंग का भरपूर लाभ उठाया. ईशान किशन के साथ मिलकर उन्होंने दूसरे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी की और भारत को एक विशाल स्कोर की ओर अग्रसर किया. यह अर्धशतक न केवल अभिषेक के लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि वर्ल्ड कप के आगामी नॉकआउट मैचों से पहले टीम इंडिया के लिए भी एक बड़ी राहत की खबर है. यदि अभिषेक इसी तरह की “आतिशी” शुरुआत देते रहे, तो भारत को तीसरा टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीतने से रोकना किसी भी टीम के लिए मुश्किल होगा.
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