Akshara Gupta Bihar Cricketer:बिहार के रक्सौल की रहने वाली महज़ 14 वर्षीय अक्षरा गुप्ता ने अपनी काबिलियत के दम पर वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसका सपना हर खिलाड़ी देखती हैं. अक्षरा को बीसीसीआई के घरेलू मुकाबलों के लिए बिहार की सीनियर महिला टीम में जगह मिली है.
बिहार के रक्सौल की रहने वाली महज 14 वर्षीय अक्षरा गुप्ता ने अपनी काबिलियत के दम पर वह मुकाम हासिल कर चुकी हैं, जिसका सपना हर खिलाड़ी देखते हैं. अक्षरा को बीसीसीआई के घरेलू मुकाबलों के लिए बिहार की सीनियर महिला टीम में जगह मिली है. यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. अक्षरा गुप्ता को उड़ीसा में होने वाले बीसीसीआई सीनियर महिला विमेंस टूर्नामेंट के लिए चयनित किया गया है. मात्र 14 साल की उम्र में सीनियर लेवल पर चयन के बाद यह माना जा रहा है कि अक्षरा जल्द ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दावेदारी पेश कर सकती हैं.

आपको बता दें कि बिहार सीनियर महिला टीम में चयन से कुछ दिनों पहले अक्षरा गुप्ता ने एकेडमी मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी मजबूत की थी. महज 14 साल की उम्र में इस युवा प्रतिभा ने खेले गए 5 मुकाबलों में कुल 361 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने एक शानदार शतक और तीन बेहतरीन अर्धशतक जड़े. इन मैचों में अक्षरा का औसत 72.2 रहा. पटना में खेले गए इन मुकाबलों के दौरान अक्षरा गुप्ता ने अपने दमदार स्ट्रोक्स, शानदार टाइमिंग और मैच को संभालने की क्षमता से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा.

अक्षरा गुप्ता के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज है. वे बीसीसीआई की आयु-श्रेणी टूर्नामेंटों के चारों प्रमुख फॉर्मेट में एक ही सीजन (2024-25) में खेलने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी बन चुकी हैं. उन्होंने अंडर-23 वनडे, अंडर-19 वनडे, अंडर-19 टी20 और अंडर-15 वनडे टूर्नामेंट में हिस्सा लिया. अंडर-15 वनडे टीम में उन्होंने उप-कप्तान की भूमिका भी निभाई. इसके अलावा, अक्षरा गुप्ता का चयन बीसीसीआई की टॉप 100 आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस सूची के लिए भी किया गया था. इस बार भी महिला अंडर-19 वनडे टूर्नामेंट मुकाबलों के दौरान टॉप-100 सूची में जगह बनाने वाली बिहार की एकमात्र खिलाड़ी बनी.
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अक्षरा गुप्ता की इस सफलता के पीछे संघर्ष और परिवार का मजबूत सहारा साफ दिखाई देता है. अक्षरा के पिता राजकिशोर शाह रक्सौल में एक छोटी-सी चिकन की दुकान चलाते हैं. जबकि उनकी मां रीना गुप्ता एक गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने अक्षरा के सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया. अक्षरा के क्रिकेट सफर में उनके चाचा रामकृपा गुप्ता की भूमिका भी बेहद अहम रही है. वे हर मैच और टूर्नामेंट में अक्षरा के साथ रहते हैं.

मिली जानकारी के अनुसार, रक्सौल में क्रिकेट ट्रेनिंग के लिए कोई बढ़िया एकेडमी उपलब्ध नहीं थी, लेकिन इससे अक्षरा गुप्ता का हौसला कभी कम नहीं हुआ. संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपने चाचा और बड़े भाई के साथ घर पर ही अस्थायी विकेट तैयार कर अभ्यास शुरू किया. अक्षरा रोजाना नियमित रूप से बैटिंग प्रैक्टिस करती हैं और अपने खेल को निखारने के लिए घंटों मेहनत करती हैं. उनका समर्पण इस बात से साफ झलकता है कि वे अभ्यास को कभी हल्के में नहीं लेती. मैदान हो या घर का आंगन, अक्षरा हर जगह खुद को बेहतर बनाने में जुटी रहती हैं.

सोशल मीडिया पर भी अक्षरा गुप्ता काफी एक्टिव रहती हैं. वे अपनी बल्लेबाजी की प्रैक्टिस से लेकर मैचों के वीडियो लगातार साझा करती हैं. इन विडियोज में उनकी मेहनत साफ नजर आती हैं. उनकी बल्लेबाजी तकनीक को क्रिकेट जानकार काफी प्रभावशाली मानते हैं. कई बड़े खिलाड़ी बैटिंग पर कमेंट भी कर चुके हैं. खास बात यह है कि अक्षरा लेफ्ट हैंड बल्लेबाज हैं. उनकी टाइमिंग और शॉट सेलेक्शन उनकी बल्लेबाजी को और भी खास बनाता है. कम उम्र में उनकी काबिलियत ने उन्हें महिला क्रिकेट की उभरती हुई प्रतिभाओं में शामिल कर दिया है.
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