बांग्लादेश और पाकिस्तान के रुख में जो समानता दिखती है, वह सवालों को और गहरा करती है. दोनों देशों में भारत को लेकर बयानबाज़ी, दोनों जगह सुरक्षा का तर्क और दोनों ही मामलों में साफ़ फैसले से बचने की कोशिश. यही वजह है कि अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या वाकई दोनों देश मिलकर वर्ल्ड कप के आयोजन को कमजोर करना चाहते हैं.
बहरूपिया बांग्लादेश
बांग्लादेश एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए भारत एक शूटिंग टीम भेज रहा है. दो सदस्यों की इस टीम एक शूटर और एक कोच को भारत आने की मंजूरी मिल चुकी है. अब ये सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों? क्या यहां कोई सुरक्षा खतरा नहीं है? भारत को असुरक्षित बताने का क्या हुआ, जब शूटिंग टीम को आने दिया गया? या फिर यह मान लिया जाए कि शूटिंग टीम क्रिकेट जितनी अहम नहीं है और उससे आसिफ़ नज़रुल को वैसी मीडिया सुर्खियां नहीं मिलेंगी, इसलिए बड़े-बड़े बयानबाज़ी का सिलसिला वहां नहीं चलेगा? यह दोहरे मापदंडों का साफ मामला है, और एक बार फिर बांग्लादेश बेनकाब होता नजर आता है. अब बस इंतजार है कि पाकिस्तान के चेहरे से मुखौटा उतरे और पूरी दुनिया उनका असली सूरत देखे.सबसे बड़ा सवाल यही है अगर भारत वास्तव में असुरक्षित है, तो फिर शूटिंग टीम को आने में कोई खतरा क्यों नहीं दिखा? क्या सुरक्षा सिर्फ क्रिकेट के लिए खतरे में है? या फिर सच यह है कि क्रिकेट एक ऐसा मंच है, जहां बयानबाज़ी करके राजनीतिक फायदा उठाया जा सकता है, जबकि शूटिंग जैसे खेल सुर्खियां नहीं बनाते?
पाकिस्तान का पीठ पर वार
यहीं से बांग्लादेश का दोहरा रवैया पूरी तरह उजागर होता है. क्रिकेट के नाम पर सुरक्षा का हौवा, भारत विरोधी बयान और मीडिया में आक्रामक रुख लेकिन दूसरे खेलों में वही देश सुरक्षित मान लिया जाता है. यह स्पष्ट संकेत है कि मसला सुरक्षा का नहीं, बल्कि क्रिकेट की लोकप्रियता और उससे मिलने वाले राजनीतिक और वैचारिक लाभ का है. अब इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका और भी संदिग्ध हो जाती है. पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप को लेकर रुख अब सबके सामने है. शुरुआत में कभी खेलने की बात, कभी बहिष्कार की धमकी, कभी सरकार के पीछे छिपने की कोशिश यह सब मिलकर एक ही रणनीति की ओर इशारा करता है अनिश्चितता पैदा करो, दबाव बनाओ और आखिरी वक्त तक आईसीसी व आयोजकों को असहज रखो.
बांग्लादेश का उदाहरण खास तौर पर चौंकाने वाला है. एक तरफ भारत को असुरक्षित बताकर क्रिकेट को निशाना बनाया जा रहा है, दूसरी तरफ उसी भारत में खिलाड़ियों और अधिकारियों को भेजा जा रहा है यह दोहरे मापदंडों का सबसे स्पष्ट सबूत है. अब सबकी निगाहें पाकिस्तान पर टिकी हैं क्या वह अंततः अपना असली चेहरा दुनिया के सामने रखेगा? या फिर आखिरी पल तक राजनीतिक मजबूरी और खेल के बीच छुपने की कोशिश जारी रहेगी? इतना तय है कि अगर वर्ल्ड कप को सबोटाज करने की कोई भी कोशिश हुई, तो उसकी कीमत सिर्फ आर्थिक नहीं होगी वह पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों को क्रिकेट की मुख्यधारा में और अलग-थलग कर सकती है.
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