अमीनुल इस्लाम बुलबुल सिर्फ बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के मौजूदा अध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि वह उस पीढ़ी के चेहरे हैं, जिन्होंने बांग्लादेश क्रिकेट को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. खिलाड़ी के तौर पर उनका करियर सीमित रहा, लेकिन प्रतीकात्मक महत्व इतना बड़ा था कि आज भी उनका नाम बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास में खास जगह रखता है. खिलाड़ी से प्रशासक बनने तक का सफर, सम्मान से विवाद तक की कहानी और भारत-विरोध के पीछे छिपे असली कारण बुलबुल की पूरी कहानी अब सवालों के कठघरे में है.
क्रिकेटर से प्रशासक बने अमीनुल इस्लाम
एक वक्त था जब अमीनुल इस्लाम बुलबुल भारत को बांग्लादेश क्रिकेट का सबसे बड़ा शुभचिंतक बताते नहीं थकते थे. वही बुलबुल आज भारत को हर मसले की जड़ बताकर सार्वजनिक मंचों से हमला बोल रहे हैं. सवाल सीधा है 25 साल पहले जिस भारत के खिलाफ पहला टेस्ट खेलते हुए गर्व महसूस कर रहे थे, उसी भारत से आज इतनी नफरत क्यों?क्रिकेट से संन्यास के बाद बुलबुल प्रशासन में आए और धीरे-धीरे बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के सबसे ताकतवर चेहरों में शामिल हो गए. आज वह बीसीबी अध्यक्ष हैं और यही कुर्सी इस पूरे विवाद की जड़ बन गई है. उनका मौजूदा रवैया बताता है कि वह अब क्रिकेट से ज्यादा राजनीतिक दबाव और सत्ता समीकरणों के हिसाब से फैसले ले रहे हैं.
बांग्लादेश के पहले कप्तान थे बुलबुल
अमीनुल इस्लाम बुलबुल वही शख्स हैं जिन्होंने साल 2000 में भारत के खिलाफ बांग्लादेश के पहले टेस्ट मैच में कप्तानी की थी. कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए उस ऐतिहासिक मुकाबले में बुलबुल ने शतक जड़ा था जो बांग्लादेश टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक भी था. उस दौर में बुलबुल भारत की भूमिका को लेकर खुले तौर पर कहते थे कि अगर भारत का समर्थन न होता, तो बांग्लादेश को टेस्ट स्टेटस मिलना बेहद मुश्किल था. आईसीसी के कई सदस्य देशों के विरोध के बावजूद भारत ने बांग्लादेश का साथ दिया यह बात खुद बुलबुल कई इंटरव्यू में स्वीकार चुके हैं.
भारत के खिलाफ अचानक जहर क्यों?
हालिया विवादों में जब आईसीसी के लगभग सभी सदस्य बोर्ड बांग्लादेश के खिलाफ खड़े दिखे, तो बुलबुल ने भारत को सीधे तौर पर निशाने पर लिया. भारत को खलनायक की तरह पेश करना दरअसल घरेलू राजनीति को खुश करने की रणनीति मानी जा रही है. भारत को निशाना बनाना आसान है, इससे देश के भीतर राष्ट्रवाद भड़कता है, प्रशासन अपनी नाकामियों से ध्यान हटा पाता है यही वजह है कि वही बुलबुल, जो कभी भारत की वजह से टेस्ट स्टेटस मिलने की बात करते थे, आज उसी भारत पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं. भारत विरोधी नैरेटिव चलाना आसान नहीं होता
अमीनुल इस्लाम बुलबुल की कहानी सिर्फ एक पूर्व क्रिकेटर की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां क्रिकेट पीछे और राजनीति आगे आ गई है. जिस भारत ने कभी बांग्लादेश क्रिकेट को खड़ा होने में मदद की, आज वही भारत बुलबुल के बयानों में खलनायक बन चुका है.
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