एबी डिविलियर्स (AB de villiers) का जन्म दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में हुआ था. उनके घर में खेल का माहौल था और वे अपने भाइयों के साथ हर तरह के खेल खेलते थे. स्कूल के दिनों तक आते-आते यह साफ हो गया था कि एबी के पास एक ऐसा ‘स्पोर्टिंग जीन’ है जो उन्हें हर खेल में दूसरों से अलग खड़ा करता है.
एब डिविलियर्स ने क्रिकेट में आने से पहले छह गेमों में अपना हाथ आजमाया.
रग्बी और हॉकी का जुनून
दक्षिण अफ्रीका में रग्बी एक धर्म की तरह है. डिविलियर्स ने स्कूल स्तर पर रग्बी में अपनी जबरदस्त पहचान बनाई थी. वे ‘ब्लू बुल्स’ की जूनियर टीम का हिस्सा थे, जो दक्षिण अफ्रीका की सबसे प्रतिष्ठित रग्बी टीमों में से एक है. उनकी फुर्ती और ताकत को देखते हुए कई जानकारों का मानना था कि वे राष्ट्रीय टीम ‘स्प्रिंगबोक्स’ के लिए भी खेल सकते थे. इसके अलावा, वे स्कूल की नेशनल जूनियर हॉकी टीम के लिए भी चुने गए थे.
टेनिस और गोल्फ में महारत
डिविलियर्स की आंखों और हाथों का तालमेल (Hand-eye coordination) इतना सटीक था कि उन्होंने टेनिस कोर्ट पर भी अपनी धाक जमाई. वे अपने आयु वर्ग में दक्षिण अफ्रीका के टॉप जूनियर टेनिस खिलाड़ियों में शामिल थे. क्रिकेट से संन्यास के बाद भी वे अक्सर गोल्फ कोर्स पर नज़र आते हैं. गोल्फ में उनका ‘हैंडीकैप’ स्कोर इतना शानदार है कि वे एक पेशेवर गोल्फ खिलाड़ी की तरह खेलते हैं.
तैराकी और एथलेटिक्स
डिविलियर्स ने स्कूल के दिनों में तैराकी में कई जूनियर नेशनल रिकॉर्ड तोड़े थे. इतना ही नहीं, वे 100 मीटर की दौड़ में भी अपने स्कूल के सबसे तेज धावक थे. उनकी यही एथलेटिक क्षमता बाद में क्रिकेट के मैदान पर उनकी शानदार फील्डिंग और विकेटों के बीच दौड़ में साफ झलकी.
अफवाहें बनाम हकीकत
इंटरनेट पर अक्सर यह दावा किया जाता रहा है कि एबी डिविलियर्स ने रग्बी, हॉकी और फुटबॉल में नेशनल लेवल पर कप्तानी की या रिकॉर्ड बनाए. हालांकि, खुद अपनी आत्मकथा में एबी ने स्पष्ट किया कि इनमें से कुछ बातें बढ़ा-चढ़ाकर कही गई हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि वे इन सभी खेलों में जूनियर नेशनल लेवल तक पहुंचे और बहुत अच्छे थे, लेकिन उनका असली प्यार हमेशा से क्रिकेट ही था.
क्रिकेट ने कैसे बदला जीवन?
जब समय आया किसी एक खेल को चुनने का, तो एबी ने क्रिकेट को चुना। उनकी अन्य खेलों की प्रतिभा ने उन्हें क्रिकेट में ‘मिस्टर 360’ बनने में मदद की. टेनिस के उनके ‘शॉट्स’, रग्बी की ‘फुर्ती’ और हॉकी की ‘कलाई का काम’ (Wrist work) उनके निराले बल्लेबाजी अंदाज में दिखाई देता था. चाहे वह आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के लिए असंभव जीत दिलाना हो या दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे तेज वनडे शतक (31 गेंद) जड़ना. डिविलियर्स ने हर जगह साबित किया कि एक महान खिलाड़ी केवल तकनीक से नहीं, बल्कि एक एथलीट की मानसिकता से बनता है.
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