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3 major challenges for team india: अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 2023 के जख्म अभी ताजा हैं. न्यूज़ीलैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप फाइनल से पहले टीम इंडिया के सामने चुनौतियां पहाड़ जैसी हैं. सपाट पिचों पर गेंदबाजी का असंतुलन, टूर्नामेंट में अब तक छूटे 13 कैच और नॉकआउट मुकाबलों में कप्तान सूर्यकुमार यादव का खराब रिकॉर्ड गंभीर चिंता का विषय है. रोहित-विराट के बिना यह युवा ब्रिगेड क्या कीवियों के ‘डेथ ट्रैप’ से निकल पाएगी? 2023 की गलतियों से सबक लेकर ही भारत विश्व विजेता बन सकता है, वरना इतिहास खुद को दोहराने के लिए तैयार है.
भारतीय टीम को फाइन से पहले इन 3 समस्याओं को सुलझाना होगा.
फ्लैशबैक में जाएं तो 2023 का वनडे वर्ल्ड कप भारत के लिए लगभग परफेक्ट था. सिवाय उस एक फाइनल के. तब हार्दिक पांड्या की चोट के कारण टीम का संतुलन बिगड़ा था और सूर्यकुमार यादव को वनडे के ‘टेंपो’ को समझे बिना लगातार मौका देना राहुल द्रविड़ की सबसे बड़ी चूक साबित हुई थी. सूर्या ने उस फाइनल में 28 गेंदों में महज 18 रन बनाए थे. आज सूर्या टी20 टीम के कप्तान हैं, लेकिन सवाल वही है क्या वह बड़े मंच (Knockouts) पर अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवा पाएंगे? ग्रुप स्टेज में यूएसए के खिलाफ अर्धशतक के बाद से उनके बल्ले से कोई बड़ी पारी नहीं निकली है.
फ्लैट ट्रैक पर गेंदबाजी का असंतुलन
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल ने भारत की गेंदबाजी की पोल खोल दी. 253 रन बनाने के बावजूद भारतीय गेंदबाज मैच को अंतिम ओवर तक ले गए. वरुण चक्रवर्ती (16.0 इकोनॉमी) और अक्षर पटेल (11.7 इकोनॉमी) जैसे स्पिनर्स सपाट पिचों पर बेअसर दिखे. चिंता की बात यह है कि बुमराह के अलावा भारत के पास फ्लैट ट्रैक का कोई भरोसेमंद विकल्प नहीं है. हार्दिक पांड्या अब छठे के बजाय पांचवें गेंदबाज बन चुके हैं, और शिवम दुबे को छठे विकल्प के तौर पर तैयार तो किया गया, लेकिन वह भरोसा नहीं जगा पाए। क्या गौतम गंभीर और सूर्या के पास ‘प्लान-बी’ तैयार है?
कैचिंग और फील्डिंग कमजोर कड़ी
अहमदाबाद की ‘रिंग ऑफ लाइट्स’ फील्डर्स के लिए हमेशा से चुनौती रही है. भारत ने इस टूर्नामेंट में अब तक सबसे ज्यादा 13 कैच छोड़े हैं. अभिषेक शर्मा जैसे युवा खिलाड़ियों की फील्डिंग में सुधार की काफी गुंजाइश है. न्यूज़ीलैंड जैसी ‘बाज़’ की नजर रखने वाली टीम के खिलाफ एक भी छूटा हुआ कैच वर्ल्ड कप की ट्रॉफी हाथ से छीन सकता है. टीम मैनेजमेंट को फाइनल से पहले कैचिंग प्रैक्टिस पर विशेष ध्यान देना होगा.
अनुभव की कमी: कौन बनेगा ‘संकटमोचक’
रोहित शर्मा और विराट कोहली के युग के बाद, यह टीम तुलनात्मक रूप से युवा है. अभिषेक शर्मा लगातार फ्लॉप हो रहे हैं, लेकिन रिजर्व में रिंकू सिंह का फॉर्म भी चिंताजनक है, इसलिए टीम शायद अभिषेक पर ही दांव लगाएगी. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर शुरुआती झटके लगते हैं, तो मध्यक्रम में वह कौन सा बल्लेबाज होगा जो दबाव झेल पाएगा? क्या सूर्या अपने पुराने ‘नॉकआउट रिकॉर्ड’ को तोड़कर एक कप्तानी पारी खेलेंगे. अहमदाबाद का यह वही मैदान है जहां 2023 में जश्न फीका पड़ा था. न्यूज़ीलैंड की टीम भारत की हर छोटी कमजोरी का फायदा उठाने में माहिर है. अगर भारत को चैंपियन बनना है, तो उन्हें केवल प्रतिभा के दम पर नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और सटीक रणनीति के साथ मैदान में उतरना होगा.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें
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